15 दिसंबर : सरदार बल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि

15 दिसंबर : सरदार बल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि : आज 15 दिसंबर है और आज ही के दिन सरदार बल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि है प्रतिवर्ष 15 दिसंबर को पूरे देश भर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है और आज के दिन इस अवसर पर उन्हें देश भर में श्रद्धांजलि दी गई सरदार बल्लभ भाई पटेल देश के पहले उप प्रधानमंत्री व गृहमंत्री थे उन्हें भारत में लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है.

सरदार बल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875  को हुआ था वह एक स्वतंत्रता सेनानी थे ,  सरदार बल्लभ भाई पटेल एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे सबसे पहले उन्होंने उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया वे  एक राजनेता के साथ-साथ एक अधिवक्ता भी थे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता थे। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई थी उन्होंने देश के एकीकरण एवं स्वतंत्र राष्ट्र में अपना मार्गदर्शन किया।

देसी राज्यों का एकीकरण

स्वतंत्रता के समय भारत में कुल 562 देशी रियासतें थी और इन रियासतों का क्षेत्रफल भारत का 40% था. देश की आजादी से ठीक पहले सरदार वल्लभ भाई पटेल और वीपी मेनन के साथ मिलकर कई रियासतों को भारत में मिलाने के लिए उन्होंने कार्य आरंभ कर दिया और 562 में से 3  रियासतों को छोड़ कर के बाकी सभी को भारत में मिला लिया।

परिणाम स्वरूप इन 3 रियासतों जिनमें जम्मू एवं कश्मीर,  हैदराबाद,  जूनागढ़ के राजाओं ने भारत में मिलने से मना कर दिया जिनमें से जूनागढ़ सौराष्ट्र के पास एक छोटी रियासत थी और चारों ओर से भारतीय भूमि से गिरी थी और वह पाकिस्तान के समीप भी नहीं था वहां के नवाब ने 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान में विलय की घोषणा कर दी लेकिन वहां की सर्वाधिक जनता हिंदू धर्म से थी और भारत में विलय चाहती थी.

उसके बाद वहां के नवाब का बहुत विरोध हुआ उसके बाद भारतीय सेना ने भी जूनागढ़ में चढ़ाई कर दी और वहां का नवाब  भाग कर पाकिस्तान चला गया और 9 नवंबर 1947 को जूनागढ़ भी भारत में मिल गया उसके बाद फरवरी 1948 में जनमत संग्रह कराया गया जो भारत में विलय के पक्ष में था उसके बाद हैदराबाद की रियासत की बारी आई और यह भी जूनागढ़ की तरह चारों तरफ से भारतीय भूमि से घिरी  थी वहां के निजाम ने पाकिस्तान के प्रोत्साहन से स्वतंत्र राज्य का दावा किया और अपनी सेना का विस्तार करने लगा उसके बाद ढेर सारे हथियार का भी आयत करता रहा.

यह सब जानकर सरदार पटेल चिंतित हो उठे और उन्होंने भारतीय सेना को हैदराबाद पर चढ़ाई का आदेश दिया और 13 सितंबर 1948 को हैदराबाद में चढ़ाई कर दी और  3 दिनों बाद वहां के निजाम ने आत्मसमर्पण कर दिया और नवंबर 1948 में भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

और लास्ट में जम्मू कश्मीर की बारी आई तो नेहरू ने कश्मीर को यह कह  कर अपने पास रख लिया कि यह समस्या एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है कश्मीर समस्या को संयुक्त राष्ट्र संघ में ले गए और जम्मू कश्मीर के अलगाववादी ताकतों के कारण वह समस्या दिन पर दिन बढ़ती गई और 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के प्रयास से जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35(a) को समाप्त कर दिया और भारत का अभिन्न अंग बन गया और इस दिन सरदार वल्लभ भाई पटेल का भारत को अखंड बनाने का सपना साकार हुआ.

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