Muhavare

मुहावरे (Muhavare) – Muhavare in Hindi अर्थ सहित

मुहावरे (Muhavare) (Idioms) :-  ऐसे वाक्यांश जो सामान्य अर्थ का बोध न कराकर विशिष्ट अर्थ का बोध कराते हैं, उनको मुहावरे करते हैं सर्वमान्य बात है कि इनके प्रयोग से भाषा सरल तथा प्रवाहात्मक बन जाती है. कुछ प्रचलित ‘मुहावरे’ अर्थ व प्रयोग सहित निम्न  है |

1. अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारना – अपने हाथ से अपना नुकसान करना |

2. अंधे के हाथ बटेर लगना – अनायास ही अयोग्य व्यक्ति को कोई अच्छी वस्तु मिल जाना |

3. अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना –  स्वयं अपनी बड़ाई करना |

⇒  प्रयोग – अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने वाले व्यक्ति का सब मजाक उड़ाते हैं |

4. अन्त बिगाड़ना-नीच कार्यों से वृद्धावस्था को कलंकित करना –
⇒  प्रयोग – लाला मनीराम को बुढ़ापे में भी घटतौली करते देखकर गोविन्द ने उससे कहा कि लाला कम-से-कम अपना अन्त तो न बिगाड़ो।

5. अपनी खिचड़ी अलग पकाना – सबसे पृथक् कार्य करना।
⇒  प्रयोग – कुछ लोग मिलकर कार्य करने के स्थान पर अपनी खिचड़ी अलग पकाना पसन्द करते हैं।

6. अपना राग अलापना-दूसरों की अनसुनी करके अपने ही स्वार्थ की बात कहना –
⇒  प्रयोग – कुछ व्यक्ति सदैव अपना ही राग अलापते रहते हैं, दूसरों के कष्ट को नहीं देखते।

7. अपने मुँह मियाँ मिट्ठ बनना-अपनी प्रशंसा स्वयं करना –
⇒  प्रयोग –  अपने मुँह मियाँ मिट्ठ बननेवाले का सम्मान धीरे-धीरे कम हो जाता है।

8. अन्न-जल उठना-मृत्यु के सन्निकट होना- 
⇒  प्रयोग – रामेश्वर की माँ की हालत बड़ी गम्भीर है, लगता है कि अब उसका अन्न-जल उठ गया है।

8. अपना उल्लू सीधा करना-अपना काम निकालना- 
⇒  प्रयोग – कुछ लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए दूसरों को हानि पहुँचाने से भी नहीं चूकते।

9. अँगारे सिर पर धरना—विपत्ति मोल लेना – 
⇒  प्रयोग – सोच-समझकर काम करना चाहिए। उससे झगड़ा लेकर व्यर्थ ही अंगारे सिर पर मत धरो।

10. अँगूठा दिखाना-इनकार करना-  जब कृष्णगोपाल मन्त्री बने थे तो उन्होंने किशोरी को आश्वासन दिया था कि जब उसका बेटा इण्टर कर लेगा तो वह उसकी नौकरी लगवा देंगे। बेटे के प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर किशोरी ने उन्हें याद दिलाई तो उन्होंने उसे अँगूठा दिखा दिया।

11. अँगूठा चूसना-बड़े होकर भी बच्चों की तरह नासमझी की बात करना-  कभी तो समझदारी की बात किया करो। कब तक अंगूठा चूसते रहोगे ?

12. अँगूठी का नगीना-अत्यधिक सम्मानित व्यक्ति अथवा वस्तु – अकबर के नवरत्नों में बीरबल तो जैसे अंगूठी का नगीना थे।

13. अन्धे की लाठी लकड़ी.होना-एकमात्र सहारा होना –  निराशा में प्रतीक्षा अन्धे की लाठी है।

14. अन्धे के आगे रोना-निष्ठुर के आगे अपना दुःखड़ा रोना – 
जिस व्यक्ति ने पैसों के लिए अपनी पत्नी को जलाकर मार दिया, उससे सहायता माँगना तो अन्धे के आगे रोना जैसा व्यर्थ है।

15. अम्बर के तारे गिनना- नींद न आना।
तुम्हारे वियोग में मैं रातभर अम्बर के तारे गिनता रहा।

16. अँगारे बरसना – अत्यधिक गर्मी पड़ना।
जून मास की दोपहरी में अंगारे बरसते प्रतीत होते हैं।

17. अंगारों पर पैर रखना – कठिन कार्य करना।
युद्ध के मैदान में हमारे सैनिकों ने अंगारों पर पैर रखकर विजय प्राप्त की।

18. अंगद का पैर होना-अति दुष्कर/असम्भव कार्य होना
यह पहाड़ी कोई अंगद का पैर तो है नहीं, जिसे हटाकर रेल की पटरी न बिछाई जा सके।

19. अन्धी सरकार—विवेकहीन शासन- 
कालाबाजारी खूब फल-फूल रही है, किन्तु अन्धी सरकार उन्हीं का पोषण करने में लगी है।

20. अंग-अंग फूले न समाना-अत्यधिक प्रसन्न होना –  राम के अभिषेक की बात सुनकर कौशल्या का अंग-अंग फूले नहीं समाया।

मुहावरे (Muhavare) – Muhavare in Hindi अर्थ सहित

21. अन्धे के हाथ बटेर लगना-भाग्यवश इच्छित वस्तु की प्राप्ति होना- 
तृतीय श्रेणी में स्नातक लोकेन्द्र को क्लर्क की नौकरी क्या मिली, मानो अन्धे के हाथों बटेर लग गई।

 

22. अक्ल के घोड़े दौड़ाना-हवाई कल्पनाएँ करना – 
परीक्षा में सफलता परिश्रम करने से ही मिलती है, केवल अक्ल के घोड़े दौड़ाने से नहीं।

23. अक्ल पर पत्थर पड़ना-बुद्धि नष्ट होना – 
राजा दशरथ ने कैकेयी को बहुत समझाया कि वह राम को वन भेजने का वरदान न माँगे; पर उसकी अक्ल पर पत्थर पड़े हुए थे; अत: वह न मानी।

24. अक्ल के पीछे लाठी लिये फिरना-मूर्खतापूर्ण कार्य करना – तुम स्वयं तो अक्ल के पीछे लाठी लिये फिरते हो, हम तुम्हारी क्या सहायता करें।

25. अक्ल चरने जाना-मति-भ्रम होना, बुद्धि भ्रष्ट हो जाना 
दुर्योधन की तो मानो अक्ल चरने चली गई थी, जो कि उसने श्रीकृष्ण के सन्धि-प्रस्ताव को स्वीकार न करके उन्हें ही बन्दी बनाने की ठान ली।

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26. अन्धों में काना राजा-मूों के बीच कम ज्ञानवाले को भी श्रेष्ठ ज्ञानवान् माना जाता है- 
कभी आठवीं पास मुंशीजी अन्धों में काने राजा हुआ करते थे; क्योंकि तब बारह-बारह कोस तक विद्यालय न थे।

27. अगर मगर करना-बचने का बहाना ढूँढना –
अब ये अगर-मगर करना बन्द करो और चुपचाप स्थानान्तण पर चले जाओ, गोपाल को उसके अधिकारी ने फटकार लगाते हुए यह कहा।

28. अटका बनिया देय उधार – जब अपना काम अटका होता है तो मजबूरी में अनचाहा भी करना पड़ता है।
जब बहू ने हठ पकड़ ली कि यदि मुझे हार बनवाकर नहीं दिया तो वह देवर के विवाह में एक भी गहना नहीं देने देगी, बेचारी सास क्या करे! अटका बनिया देय उधार और उसने बहू को हार बनवा दिया।

29. अक्ल का अन्धा-मूर्ख – 
वह लड़का तो अक्ल का अन्धा है, उसे कितना ही समझाओ, मानता ही नहीं है।

30. अधजल गगरी छलकत जाए-अज्ञानी पुरुष ही अपने ज्ञान की शेखी बघारते हैं-
आठवीं फेल कोमल अपनी विद्वत्ता की बड़ी-बड़ी बातें करती है। आखिर करे भी क्यों नहीं, अधजल गगरी छलकत जाए।

 

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