मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि और उनके बारे में

मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि और उनके बारे में : – आज 27 जुलाई 2019 को मिसाइल मैन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी पुण्यतिथि को पूरा भारत एक साथ श्रद्धांजलि दे रहा है , डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एक अमूल्य रत्न थे डॉ0 एपीजे अब्दुल कलाम की यह चौथी पुण्यतिथि है|

मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि और उनके बारे में

” हमें हार नहीं माननी चाहिए और हमें समस्याओं को खुद को हराने नहीं देना चाहिए “

मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के यह महान विचार थे देश के पूर्व राष्ट्रपति और भारतीय मिसाइल प्रोग्राम के जनक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एक बहुत ही मेहनती और और एक अच्छी सोच रखने वाले व्यक्ति थे अब्दुल कलाम ने एक  वैज्ञानिक और इंजीनियर के तौर पर उन्होंने डीआरडीओ और इसरो के कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया इस मौके पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद,  नितिन गडकरी , जीतेंद्र सिंह समेत देश के तमाम बड़े नेता और देशवासी उन्हें याद कर रहे हैं और श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं |

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम शिलांग में लेक्चर देते वक्त दिल का दौरा पड़ने के कारण आज ही के दिन 27 जुलाई 2015 को उनका निधन हो गया उनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा |

दिल का दौरा पड़ने पर आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने अफसोस जताते हुए उन्हें मृत घोषित कर दिया , 83 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया उनकी सादगी से जुड़े किस्से भी लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं |

उनके बारे में –

एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अब्दुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम था | डॉ0 एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1921 को तमिलनाडु के रामेश्वरम जिले में हुआ था कलाम को कहा जाता है कि कलाम अपने घर में दीपक जलाकर पढ़ाई करते थे क्योंकि उस वक्त उनके घर पर बिजली नहीं थी और वह एक गरीब परिवार से थे 8 साल की उम्र में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम सुबह 4:00 बजे उठकर गणित पढ़ते थे |

Daily Current Affairs Digest 27 July 2019

गरीबी की वजह से डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर जाकर अखबार भी बेचना पड़ा उन्होंने साल 1950 में मद्रास इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की उन्होंने अपनी देखरेख में 1998 में पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया तथा परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में भारत को शामिल किया वे अपने व्यक्तिगत जीवन पूरी तरह अनुशासन का पालन करने वाले थे उन्होंने अपनी जीवनी ” विंग्स ऑफ़ फायर “ भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज में लिखी है उनकी दूसरी पुस्तक “गाइडिंग सोल्स डायलॉग ऑफ द परपज ऑफ लाइफ “आध्यात्मिक विचारों को दर्शाता है |

कलाम ने कहा था कि इस्तेमाल की गई मिसाइलों को दोबारा इस्तेमाल में लाया जाए –

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का कहना था कि जो भी इस्तेमाल की गई मिसाइलें हैं उनको दोबारा इस्तेमाल में लाया जाए यह बात डीआरडीओ के प्रमुख सतीश रेड्डी को कहा गया था रेडी उस वक्त रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार थे रेडी ने कलाम से मुलाकात कर  याद करते हुए बताया कि वैज्ञानिक सलाहकार बनने के बाद उन्होंने उनसे उनके निधन से महज महीने भर पहले उनके आवास पर मुलाकात की थी और उन्होंने दोबारा मिसाइल को इस्तेमाल करने वाले टेक्नोलॉजी पर काम करने को कहा था जो कि मिसाइल एक बार पेलोड ले जाने के बाद दोबारा से धरती पर आ सके और दोबारा से उसको रीलॉन्च किया जा सके |

पुरस्कार और सम्मान-

एपीजे अब्दुल कलाम को भारत सरकार ने साल 1981 में पद्म भूषण पुरस्कार और साल 1990 में पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था उन्होंने 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया था भारत रत्न एक ऐसा रत्न है जो कि भारत के सर्वोच्च नागरिक का सम्मान होता है उनके पहले यह मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया था |

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